दलीप ट्रॉफी
दलीप ट्रॉफी भारत के सबसे प्रतिष्ठित प्रथम श्रेणी क्रिकेट टूर्नामेंटों में से एक है, जिसमें जोनल टीमें हिस्सा लेती हैं और जिसने भारतीय क्रिकेट के कई भविष्य के सितारे तैयार किए हैं। 1961-1962 में अपने पहले संस्करण से लेकर अब तक, इस प्रतियोगिता ने यादगार प्रदर्शन और फॉर्मेट में बदलाव देखे हैं, लेकिन यह हमेशा लाल गेंद के खिलाड़ियों को चमकने का अहम मंच प्रदान करती रही है। दशकों में इसने अविस्मरणीय शतक, जबरदस्त स्पिन मुकाबले और रोमांचक फिनिश दिए हैं, जिससे घरेलू क्रिकेट प्रशंसकों के पास जश्न मनाने के कई मौके रहे। यह टूर्नामेंट खिलाड़ियों के लिए ऊँचे स्तर की प्रतियोगिताओं में जगह बनाने का अहम रास्ता बना हुआ है और पारंपरिक मल्टी-डे क्रिकेट पसंद करने वालों का पसंदीदा टूर्नामेंट है।
63वां संस्करण (23 अगस्त – 10 सितंबर, 2026) में ईस्ट जोन ने चेन्नई के एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम में बारिश से प्रभावित फाइनल में साउथ जोन को पहली पारी की बढ़त के आधार पर हराकर अपना खिताब सुनिश्चित किया। यह ईस्ट जोन का दलीप ट्रॉफी में तीसरा खिताब था, और 2012-2013 के बाद इस बार उनका खिताबी सूखा खत्म हुआ, कप्तान ईशान किशन की फाइनल में 270 और 80 रन की दोहरी पारियों की बदौलत। पिछले संस्करणों में वेस्ट जोन जैसी दिग्गज टीमों का दबदबा रहा है, लेकिन हाल के सीजन में सभी जोनों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली है।
परिचय
दलीप ट्रॉफी लंबे समय से भारतीय क्रिकेट की सबसे महत्वपूर्ण रेड-बॉल प्रतियोगिताओं में से एक रही है, जिसे दशकों की क्षेत्रीय पहचान और प्लेयर्स के विकास ने आकार दिया है। 1961-1962 में शुरू हुई और KS Duleepsinhji के नाम पर रखी गई इस प्रतियोगिता का उद्देश्य पूरे भारत से सबसे मजबूत टैलेंट को एक ऐसे फॉर्मेट में एक साथ लाना था, जो अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के ठीक नीचे आता है। समय के साथ इस टूर्नामेंट का स्ट्रक्चर जोनल टीमों से मिक्स्ड स्क्वाड और फिर वापस जोनल टीमों तक बदला है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य हमेशा एक जैसा रहा है: खिलाड़ियों को चुनौतीपूर्ण मल्टी-डे परिस्थितियों में परखना और उन खिलाड़ियों की पहचान करना जो उच्च स्तर के लिए तैयार हैं। इसका फॉर्मेट आमतौर पर नॉकआउट मैचों पर आधारित होता है, जिससे मुकाबलों में प्रतिस्पर्धा बनी रहती है और हर पारी महत्वपूर्ण हो जाती है। डोमेस्टिक क्रिकेट कैलेंडर में इसकी जगह ने इसे स्टेट क्रिकेट और नेशनल सेटअप के बीच एक ब्रिज की भूमिका निभाने में मदद की है, जिससे सिलेक्टर्स को उभरते हुए परफॉर्मर्स को बेहतर तरीके से देखने का मौका मिलता है।
क्रिकेट के पहलू से आगे, दलीप ट्रॉफी यह भी दर्शाती है कि भारत की स्पोर्टिंग संस्कृति किस तरह विकसित हुई है। 1990 के दशक से ब्रॉडकास्ट कवरेज लगातार बढ़ा, जिससे डोमेस्टिक क्रिकेट घर-घर तक पहुंचा और फैंस को भविष्य के सितारों को करीब से देखने का मौका मिला। स्पॉन्सरशिप पैटर्न भी समय के साथ बेहतर हुए हैं, जहां ब्रांड्स ने अनुशासन, धैर्य और क्षेत्रीय पहचान को दिखाने वाले इस टूर्नामेंट के साथ जुड़ने की वैल्यू को पहचाना है। शेड्यूलिंग में सुधार, बेहतर ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और अधिक लगातार पिच तैयार करने की प्रक्रिया ने वर्षों के दौरान इस प्रतियोगिता को ज्यादा प्रोफेशनल बनाया है, जबकि ट्रेडिशनल फर्स्ट-क्लास क्रिकेट की इसकी खासियत अभी भी बनी हुई है।
जैसे-जैसे आप पूरे आर्टिकल को पढ़ेंगे, आपको इसके फॉर्मेट, शानदार दौर और भारत की क्रिकेट पाइपलाइन को तैयार करने में इसकी भूमिका पर गहरी जानकारी मिलेगी। अगर आप इस सेक्शन को अंग्रेज़ी में पढ़ना चाहते हैं, तो आप स्थानीय क्रिकेट चर्चाओं से जुड़ी भाषा और संदर्भ के लिए अनुवादित वर्जन पर स्विच कर सकते हैं (दलीप ट्रॉफी हिंदी समीक्षा)। अनुवादित पेज टर्मिनोलॉजी और स्टोरीटेलिंग के उन पहलुओं को भी दिखाता है, जिन्हें कई पाठक दोनों वर्जन की तुलना करते समय पसंद करते हैं।
इन दोनों नजरियों के साथ दलीप ट्रॉफी की पूरी समझ बनती है और यह साफ होता है कि यह सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की लंबे समय से चली आ रही एक महत्वपूर्ण संस्था क्यों बनी हुई है।
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चालू सीजन
2026-2027 दलीप ट्रॉफी 23 अगस्त से 10 सितंबर 2026 तक खेली गई, और चेन्नई के एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम में ड्रॉ रहे फाइनल में साउथ जोन को पहली पारी की बढ़त के आधार पर हराकर ईस्ट जोन ने खिताब अपने नाम किया।
63वें संस्करण में भी वही छह-जोन नॉकआउट फॉर्मेट रहा जिसे बीसीसीआई ने पिछले सीजन वापस लाया था, लेकिन इस बार लंबे लीग चरण की बजाय सिर्फ तीन राउंड में पांच मैच खेले गए: दो क्वार्टर फाइनल, दो सेमीफाइनल और फाइनल। पिछले सीजन के चैंपियन सेंट्रल जोन और रनर-अप साउथ जोन को सीधे सेमीफाइनल में जगह मिली, जबकि ईस्ट जोन, नॉर्थ जोन, वेस्ट जोन और नॉर्थ ईस्ट जोन को पहले क्वार्टर फाइनल से गुजरना पड़ा। नॉकआउट स्टेज के चारों मैच बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बिना दर्शकों के खेले गए चार-दिवसीय मुकाबले थे; सिर्फ फाइनल पूरे पांच दिन का था, और हाल के संस्करणों से हटकर बीसीसीआई ने इसे बेंगलुरु से हटाकर चेन्नई के एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम में शिफ्ट किया, खासतौर पर इसलिए ताकि दर्शक स्टेडियम में जाकर मैच देख सकें।
दलीप ट्रॉफी हमेशा से भारत के डोमेस्टिक सीजन का पहला टूर्नामेंट रहा है, और इस बार यह वाकई एक बहुत बड़े कैलेंडर की शुरुआत थी: बीसीसीआई का पूरा 2026-2027 डोमेस्टिक कार्यक्रम पुरुष और महिला क्रिकेट तथा अंडर-16 से ऊपर की हर उम्र-श्रेणी में कुल 1,788 मैचों तक फैला है, जो अगस्त में इसी टूर्नामेंट से शुरू होकर मार्च में रणजी ट्रॉफी के फाइनल तक चलता है। टाइमिंग की वजह से यह टूर्नामेंट सीनियर टीम की झलक दिखाने की बजाय भारत की रेड-बॉल गहराई की असली परख बन गया: भारतीय टेस्ट टीम 27 अगस्त तक श्रीलंका के दो टेस्ट मैचों के दौरे पर थी, जो सीधे दलीप ट्रॉफी के क्वार्टर फाइनल राउंड से टकराया, इसलिए कई अनुबंधित अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी शुरुआती राउंड के लिए उपलब्ध ही नहीं थे, और यह मौका ज्यादातर फ्रिंज इंटरनेशनल्स और अनकैप्ड खिलाड़ियों के हाथ आया, जो सीधे राष्ट्रीय चयन के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे थे। यह टकराव कोई इकलौता संयोग नहीं बल्कि कैलेंडर की एक तयशुदा बनावट है, क्योंकि बीसीसीआई दलीप ट्रॉफी की शुरुआत हमेशा पिछली अंतरराष्ट्रीय सीरीज खत्म होते ही कर देता है।
खिताब तक ईस्ट जोन का सफर ही इस टूर्नामेंट की सबसे बड़ी कहानी रहा। उन्होंने क्वार्टर फाइनल में नॉर्थ ईस्ट जोन को एक पारी और 210 रन से हराकर शुरुआत की, फिर सेमीफाइनल में डिफेंडिंग चैंपियन सेंट्रल जोन को 4 विकेट से हराया, इससे पहले कि उनका सामना फाइनल में साउथ जोन से हो, जिसने दूसरे सेमीफाइनल में नॉर्थ जोन को 7 विकेट से हराया था। फाइनल में आउटराइट नतीजा नहीं निकल पाया: ईस्ट जोन का बड़ा पहली पारी का स्कोर साउथ जोन की पहुंच से बाहर था, और पांचवें दिन मैच ड्रॉ होने के बाद ईस्ट जोन को पहली पारी की बढ़त के आधार पर चैंपियन घोषित किया गया। यह ईस्ट जोन का तीसरा दलीप ट्रॉफी खिताब था और 2012-2013 के बाद पहला, जिसने 13 साल का सूखा खत्म किया और सेंट्रल जोन को लगातार दूसरे खिताब से रोक दिया।
- क्वार्टर फाइनल: ईस्ट जोन ने नॉर्थ ईस्ट जोन को एक पारी और 210 रन से हराया
- क्वार्टर फाइनल: नॉर्थ जोन ने वेस्ट जोन को 52 रन से हराया
- सेमीफाइनल: ईस्ट जोन ने सेंट्रल जोन को 4 विकेट से हराया
- सेमीफाइनल: साउथ जोन ने नॉर्थ जोन को 7 विकेट से हराया
- फाइनल: ईस्ट जोन ने साउथ जोन को पहली पारी की बढ़त के आधार पर हराया (मैच ड्रॉ)
टूर्नामेंट के सभी पांचों मैच JioHotstar पर लाइव स्ट्रीम किए गए, जिससे पिछले वर्षों के उलट, जहां सिर्फ नॉकआउट राउंड दिखाए जाते थे, इस बार पहले क्वार्टर फाइनल से ही पूरी कवरेज मिली। यह इस सीजन खासतौर पर मायने रखता था, क्योंकि शुरुआती चार मैच बिना दर्शकों के खेले गए, ऐसे में स्ट्रीमिंग और टीवी ही फैंस के लिए फाइनल के चेन्नई के पब्लिक स्टेडियम में शिफ्ट होने से पहले टूर्नामेंट फॉलो करने का इकलौता जरिया थे।
दलीप ट्रॉफी 2026 प्राइज मनी और स्पॉन्सरशिप: मौजूदा स्थिति क्या है
बीसीसीआई ने 2023 में लागू किया गया प्राइज स्ट्रक्चर ही बरकरार रखा: चैंपियन के लिए ₹1 करोड़ और रनर-अप के लिए ₹50 लाख, यानी ट्रॉफी के साथ-साथ ईस्ट जोन को सात अंकों की रकम भी मिली। इससे दलीप ट्रॉफी विजय हजारे ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के बराबर आर्थिक स्तर पर आ जाती है, हालांकि रणजी ट्रॉफी से अब भी काफी पीछे है, जिसके चैंपियन को अब ₹5 करोड़ मिलते हैं।
स्पॉन्सरशिप के मामले में हालांकि एक असली खालीपन है। 2019 से दलीप ट्रॉफी पर लगातार बीसीसीआई का कोई न कोई टाइटल स्पॉन्सर रहा है, पहले Paytm, फिर Mastercard, और 2023 से IDFC First Bank, लेकिन IDFC First के अधिकार अगस्त 2026 में ठीक इसी संस्करण की शुरुआत के साथ खत्म हो गए, और नए स्पॉन्सर के लिए बीसीसीआई के टेंडर को ऊंची कीमत के चलते ज्यादा दिलचस्पी नहीं मिली। टूर्नामेंट चलने के दौरान Google Gemini, Spinny और SBI Life के इन अधिकारों के लिए बातचीत में होने की खबरें आईं, लेकिन ईस्ट जोन के खिताब जीतने तक कोई नया टाइटल स्पॉन्सर तय नहीं हुआ था, जिससे यह पिछले कई सालों में पहली दलीप ट्रॉफी बन गई जो बिना किसी पक्के टाइटल स्पॉन्सर के खेली गई।
अगली दलीप ट्रॉफी की तारीखों का अभी ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन पिछले कई सालों से यह टूर्नामेंट अगस्त-सितंबर के विंडो में ही भारत के डोमेस्टिक सीजन की शुरुआत करता आया है, इसलिए 2027 में भी लगभग इसी समय अगला संस्करण होने की उम्मीद की जा सकती है। बीसीसीआई मौजूदा छह-जोन नॉकआउट फॉर्मेट पर टिकेगा या नहीं, और तब तक उसका टाइटल स्पॉन्सर कौन होगा, यह इससे काफी पहले साफ हो जाने की संभावना है।
पिछले सीज़न
पिछले दलीप ट्रॉफी सीजन
- 2026-2027 सीजन
2026-2027 दलीप ट्रॉफी, टूर्नामेंट का 63वां संस्करण, 23 अगस्त से 10 सितंबर तक खेला गया और वही छह-जोन नॉकआउट फॉर्मेट बरकरार रहा जो 2022-2023 में जोनल स्ट्रक्चर वापस आने के बाद से चला आ रहा है, जिसमें पिछले संस्करण के चैंपियन सेंट्रल जोन और रनर-अप साउथ जोन को सीधे सेमीफाइनल में जगह मिली। क्वार्टर फाइनल में ईस्ट जोन ने नॉर्थ ईस्ट जोन को एक पारी और 210 रन से हराया और नॉर्थ जोन ने वेस्ट जोन को 52 रन से हराया; इसके बाद ईस्ट जोन ने सेमीफाइनल में सेंट्रल जोन को 4 विकेट से हराकर फाइनल में जगह बनाई, जहां उनका सामना साउथ जोन से हुआ, जिसने दूसरे सेमीफाइनल में नॉर्थ जोन को 7 विकेट से हराया था। चेन्नई के एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम में खेले गए फाइनल में ईस्ट जोन ने 708 और 388/7 (डिक्लेयर) रन बनाए, जवाब में साउथ जोन 336 रन पर सिमट गई, और पांचवें दिन मैच ड्रॉ होने के बाद ईस्ट जोन को पहली पारी की बढ़त के आधार पर चैंपियन घोषित किया गया।
हाल के संस्करणों से अलग सिर्फ एक बदलाव फाइनल के वेन्यू का था: 2025-2026 संस्करण तक हर मैच बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में खेला जाता रहा था, लेकिन बीसीसीआई ने 2026-2027 का फाइनल खासतौर पर चेन्नई शिफ्ट किया ताकि दर्शक स्टेडियम में आकर मैच देख सकें, क्योंकि इससे पहले के चारों नॉकआउट मैच बिना दर्शकों के खेले गए थे। इस नतीजे ने दलीप ट्रॉफी के फाइनल में ईस्ट जोन के अजेय रिकॉर्ड को भी बढ़ा दिया, जो अब तीन मौकों में तीन जीत तक पहुंच चुका है, इससे पहले उन्होंने 2011-2012 और 2012-2013 में खिताब जीता था, यानी फाइनल में टीम का सफर हर बार खिताब के साथ ही खत्म हुआ है।
- 2025-2026 सीजन
2025-2026 दलीप ट्रॉफी 28 अगस्त से 15 सितंबर 2025 तक खेली गई, जिसमें नॉर्थ, साउथ, ईस्ट, वेस्ट, सेंट्रल और नॉर्थ-ईस्ट को शामिल करने वाले छह-जोन फॉर्मेट की पूरी वापसी हुई। टूर्नामेंट के सभी मैच बेंगलुरु के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में आयोजित किए गए, जिससे टूर्नामेंट को एक स्थिर वेन्यू और सीजन की शुरुआत में मजबूत विजिबिलिटी मिली। यह इवेंट नॉकआउट स्ट्रक्चर पर आधारित था, जिसमें क्वार्टरफाइनल में नॉर्थ जोन का मुकाबला ईस्ट जोन से और सेंट्रल जोन का मुकाबला नॉर्थ-ईस्ट जोन से हुआ, जबकि साउथ और वेस्ट जोन ने सीधे सेमीफाइनल में एंट्री की। सेंट्रल जोन ने फाइनल में साउथ जोन को छह विकेट से हराकर चैंपियनशिप जीती और अपना सातवां दलीप ट्रॉफी खिताब हासिल किया, जो एक दशक से ज्यादा समय बाद उनका पहला खिताब था। फाइनल में अनुशासित स्पिन बॉलिंग और संयमित रन चेज देखने को मिला, जिसने पूरे सीजन के प्रतिस्पर्धी संतुलन को दर्शाया।
2025-2026 एडिशन में कई खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, जिसमें रजत पाटीदार सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे, जबकि सेंट्रल जोन की स्पिन जोड़ी सारांश जैन और कुमार कार्तिकेय ने टीम के टाइटल जीतने में अहम भूमिका निभाई। टूर्नामेंट के बाद के स्टेज में ब्रॉडकास्ट कवरेज में सुधार देखने को मिला और नॉकआउट फॉर्मेट में बढ़ती दिलचस्पी के साथ फाइनल्स में ज्यादा दर्शक पहुंचे। इस टूर्नामेंट ने जोनल रेड-बॉल क्रिकेट की अहमियत को फिर से मजबूत किया और सीजन की शुरुआत में खिलाड़ियों की फॉर्म और कंडीशंस का स्पष्ट संकेत दिया, जिसका असर टीम चयन और परफॉर्मेंस एनालिसिस पर भी देखने को मिला।
- 2024-2025 सीजन
2024 दलीप ट्रॉफी अलग थी क्योंकि इसमें चार टीमें थीं: इंडिया A, B, C और D. इसमें कई दिलचस्प मैच और कहानियां सामने आईं। यह ढांचा सामान्य क्षेत्रीय प्रणाली से अलग था। टूर्नामेंट का खिताब इंडिया A ने जीता, जिसकी कप्तानी मयंक अग्रवाल ने की और उन्होंने रोमांचक फाइनल में इंडिया C को हराया। चैंपियनशिप मैच बेहद करीबी था और आखिरी दिन तक नतीजा तय नहीं हुआ, जिससे दोनों टीमों की ताकत और जज़्बा साफ दिखा।
कई खिलाड़ियों ने ऐसे प्रदर्शन किए जो लंबे समय तक याद रखे जाएंगे। उदाहरण के लिए, इंडिया C के युवा साई सुधर्शन ने फाइनल में कठिन परिस्थिति में शतक जमाया और मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ अपनी क्षमता दिखाई। इंडिया A की जीत में प्रसिद्ध कृष्णा की गेंदबाजी और तनुश कोटियन के ऑलराउंड प्रदर्शन का अहम योगदान रहा। यह दर्शाता है कि भारतीय घरेलू सर्किट में कितनी गहरी प्रतिभा मौजूद है। टूर्नामेंट में प्रतिस्पर्धा का स्तर बहुत ऊंचा रहा और कई मैचों का फैसला अंतिम पलों में हुआ। खिलाड़ी राष्ट्रीय चयन की दौड़ में बने रहने के लिए खेल रहे थे, इसलिए क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता की बजाय व्यक्तिगत प्रदर्शन पर अधिक ध्यान था। यह फॉर्मेट अलग था, लेकिन इसने खिलाड़ियों को सिर्फ दूसरे क्षेत्रों के खिलाड़ियों ही नहीं बल्कि उच्च स्तर की प्रतिभा के खिलाफ खुद को परखने का मौका दिया।
2024 का इवेंट राउंड-रॉबिन प्रणाली में हुआ, जिसमें नॉकआउट राउंड शामिल नहीं थे। लीग स्टेज के अंत में सबसे अधिक अंक वाली टीम विजेता बनी। मैचों की संरचना ऐसी थी कि हर मुकाबला अहम था और एक हार टीम की खिताब जीतने की उम्मीदों को प्रभावित कर सकती थी। नॉकआउट फॉर्मेट की तरह यहां अचानक रणनीति बदलने की गुंजाइश नहीं थी, बल्कि लगातार अच्छा प्रदर्शन ही सबसे महत्वपूर्ण था। इस प्रतियोगिता में निर्णय समीक्षा प्रणाली (DRS) का भी उपयोग किया गया, जिससे मैचों में रणनीति और गहराई जुड़ गई।
दर्शक संख्या अपेक्षाकृत कम रही लेकिन माहौल उत्साही था, और चर्चा का केंद्र भारतीय क्रिकेट का भविष्य रहा। आर्थिक दृष्टि से, इस टूर्नामेंट ने युवा खिलाड़ियों की पहचान मजबूत करने में मदद की, जिससे उन्हें अन्य घरेलू लीगों में बेहतर अवसर मिले। एक खास पहलू यह भी रहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने इस नए फॉर्मेट को राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर समर्थन दिया। इससे यह संकेत मिला कि वे घरेलू क्रिकेट को रोचक बनाए रखने के लिए प्रयोग करने को तैयार हैं। 2024 की दलीप ट्रॉफी अपनी अनोखी संरचना के साथ अगली पीढ़ी के भारतीय खिलाड़ियों के लिए एक अहम परीक्षा साबित हुई और इसने 2025 में क्षेत्रीय प्रणाली की वापसी की राह भी खोली।
- पहले के सीजन
भारत के घरेलू क्रिकेट कैलेंडर में एक प्रमुख टूर्नामेंट, 2023 दलीप ट्रॉफी में छह टीमों के बीच पारंपरिक क्षेत्रीय मुकाबले खेले गए: उत्तर-पूर्व क्षेत्र, दक्षिण क्षेत्र, पूर्व क्षेत्र, पश्चिम क्षेत्र, मध्य क्षेत्र और उत्तर क्षेत्र। 28 जून से 16 जुलाई 2023 तक आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता ने खिलाड़ियों को अपना कौशल दिखाने और राष्ट्रीय चयन के लिए प्रतिस्पर्धा करने का मौका दिया। प्रतियोगिता का ढांचा नॉकआउट था, जिसमें क्वार्टर फाइनल से लेकर फाइनल तक का सफर तय किया गया।
जोनल टीमों ने 2023 दलीप ट्रॉफी क्वार्टर फाइनल में कड़ी प्रतिस्पर्धा की। अलूर के KSCA क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए मुकाबले में नॉर्थ जोन ने नॉर्थ-ईस्ट जोन को पारी और 214 रन से हराया। शुभमन गिल का दोहरा शतक और नवदीप सैनी व जयदेव उनादकट की गेंदबाजी इस जीत में निर्णायक रही। बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए दूसरे क्वार्टर फाइनल में मध्य क्षेत्र और पूर्व क्षेत्र आमने-सामने थे। रिंकू सिंह की दमदार बल्लेबाजी ने मध्य क्षेत्र को पूर्व क्षेत्र द्वारा दिए गए छोटे लक्ष्य को आसानी से पार कराया और पांच विकेट से जीत दिलाई।
रोमांचक मुकाबले सेमीफाइनल तक जारी रहे। अलूर के KSCA क्रिकेट ग्राउंड में मध्य क्षेत्र और पश्चिम क्षेत्र भिड़े। वेस्ट जोन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी। मैच बेहद प्रतिस्पर्धी रहा और ड्रॉ पर खत्म हुआ, लेकिन बेहतर पहली पारी की बढ़त के आधार पर वेस्ट जोन फाइनल में पहुंचा। बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए दूसरे सेमीफाइनल में साउथ जोन और नॉर्थ जोन आमने-सामने हुए। फॉलोऑन लागू करने के बाद साउथ जोन ने 2 विकेट से जीत दर्ज की। नॉर्थ जोन की बल्लेबाजी विद्वत कावेरप्पा की पांच विकेट की धारदार गेंदबाजी और मयंक अग्रवाल की पारी के आगे ढह गई।
फाइनल मुकाबला पश्चिम क्षेत्र और दक्षिण क्षेत्र के बीच बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला गया। वेस्ट जोन ने टॉस जीतकर पहले क्षेत्ररक्षण चुना। साउथ जोन ने 75 रन से जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम किया। विद्वत कावेरप्पा ने दोनों पारियों में अहम विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन जारी रखा, जबकि हनुमा विहारी की पारी ने जीत सुनिश्चित की। वेस्ट जोन की बल्लेबाजी लाइनअप संयुक्त गेंदबाजी आक्रमण के सामने टिक नहीं सकी। प्लेयर ऑफ द मैच विद्वत कावेरप्पा बने। इस तरह साउथ जोन ने 14वीं बार खिताब जीता।
| सीजन | विजेता | उपविजेता | फाइनल परिणाम | इवेंट / फाइनल लोकेशन |
|---|---|---|---|---|
| 2026-2027 | पूर्वी क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र | पूर्वी क्षेत्र पहली पारी की बढ़त के आधार पर जीता | एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम, चेन्नई |
| 2025-2026 | मध्य क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र | मध्य क्षेत्र ने फाइनल जीता | बीसीसीआई सीओई ग्राउंड बेंगलुरु |
| 2024-2025 | इंडिया ए | इंडिया सी | इंडिया ए पॉइंट्स टेबल में शीर्ष पर रहा | अनंतपुर और बेंगलुरु |
| 2023-2024 | दक्षिण क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र 75 रन से जीता | एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम, बेंगलुरु |
| 2022-2023 | पश्चिम क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र 294 रन से जीता | एसएनआर कॉलेज क्रिकेट ग्राउंड, कोयंबटूर |
| 2019-2020 | इंडिया रेड | इंडिया ग्रीन | इंडिया रेड एक पारी और 38 रन से जीता | एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम, बेंगलुरु |
| 2018-2019 | इंडिया ब्लू | इंडिया रेड | इंडिया ब्लू एक पारी और 187 रन से जीता | एनपीआर कॉलेज ग्राउंड डिंडीगुल |
| 2017-2018 | इंडिया रेड | इंडिया ब्लू | इंडिया रेड 163 रन से जीता | एकाना क्रिकेट स्टेडियम, लखनऊ |
| 2016-2017 | इंडिया ब्लू | इंडिया रेड | इंडिया ब्लू 355 रन से जीता | ग्रेटर नोएडा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स ग्राउंड |
| 2014-2015 | मध्य क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र | मध्य क्षेत्र 9 रन से जीता | अरुण जेटली स्टेडियम, नई दिल्ली |
| 2013-2014 | उत्तरी क्षेत्र और दक्षिण क्षेत्र | ड्रॉ | मैच ड्रॉ रहा और खिताब साझा किया गया | जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम कोच्चि |
| 2012-2013 | पूर्वी क्षेत्र | मध्य क्षेत्र | पूर्वी क्षेत्र पहली पारी की बढ़त के आधार पर जीता | एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम, चेन्नई |
| 2011-2012 | पूर्वी क्षेत्र | मध्य क्षेत्र | पूर्वी क्षेत्र एक पारी और 20 रन से जीता | होलकर क्रिकेट स्टेडियम, इंदौर |
| 2010-2011 | दक्षिण क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र 7 विकेट से जीता | एसीए-वीडीसीए स्टेडियम, विशाखापट्टनम |
| 2009-2010 | पश्चिम क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र 3 विकेट से जीता | लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम हैदराबाद |
| 2008-2009 | पश्चिम क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र 274 रन से जीता | एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम, चेन्नई |
| 2007-2008 | उत्तरी क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र 6 विकेट से जीता | वानखेड़े स्टेडियम, मुंबई |
| 2006-2007 | उत्तरी क्षेत्र | श्रीलंका ए | उत्तरी क्षेत्र 8 विकेट से जीता | ईडन गार्डन्स, कोलकाता |
| 2005-2006 | पश्चिम क्षेत्र | पूर्वी क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र 5 विकेट से जीता | सरदार पटेल स्टेडियम, अहमदाबाद |
| 2004-2005 | मध्य क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र | मध्य क्षेत्र 9 विकेट से जीता | वीसीए स्टेडियम, सिविल लाइंस, नागपुर |
| 2003-2004 | उत्तरी क्षेत्र | पूर्वी क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र 59 रन से जीता | पीसीए स्टेडियम मोहाली |
| 2002-2003 | एलीट सी | प्लेट बी | एलीट सी लीग टेबल में शीर्ष पर रहा | लीग फॉर्मेट |
| 2001-2002 | पश्चिम क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र लीग टेबल में शीर्ष पर रहा | लीग फॉर्मेट |
| 2000-2001 | उत्तरी क्षेत्र | मध्य क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र लीग टेबल में शीर्ष पर रहा | लीग फॉर्मेट |
| 1999-2000 | उत्तरी क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र पहली पारी की बढ़त के आधार पर जीता | ईडन गार्डन्स, कोलकाता |
| 1998-1999 | मध्य क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र | मध्य क्षेत्र 122 रन से जीता | एन2 स्टेडियम औरंगाबाद |
| 1997-1998 | मध्य क्षेत्र और पश्चिम क्षेत्र | ड्रॉ | मैच ड्रॉ रहा और खिताब साझा किया गया | एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम, चेन्नई |
| 1996-1997 | मध्य क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र | मध्य क्षेत्र 161 रन से जीता | पीसीए स्टेडियम मोहाली |
| 1995-1996 | दक्षिण क्षेत्र | मध्य क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र लीग टेबल में शीर्ष पर रहा | लीग फॉर्मेट |
| 1994-1995 | उत्तरी क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र लीग टेबल में शीर्ष पर रहा | लीग फॉर्मेट |
| 1993-1994 | उत्तरी क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र लीग टेबल में शीर्ष पर रहा | लीग फॉर्मेट |
| 1992-1993 | उत्तरी क्षेत्र | मध्य क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र 4 विकेट से जीता | आईपीसीएल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स वडोदरा |
| 1991-1992 | उत्तरी क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र 8 विकेट से जीता | सवाई मानसिंह स्टेडियम, जयपुर |
| 1990-1991 | उत्तरी क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र 9 विकेट से जीता | वानखेड़े स्टेडियम, मुंबई |
| 1989-1990 | दक्षिण क्षेत्र | मध्य क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र 322 रन से जीता | एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम, चेन्नई |
| 1988-1989 | उत्तरी क्षेत्र और पश्चिम क्षेत्र | ड्रॉ | मैच ड्रॉ रहा और खिताब साझा किया गया | कीनन स्टेडियम जमशेदपुर |
| 1987-1988 | उत्तरी क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र 7 विकेट से जीता | एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम, चेन्नई |
| 1986-1987 | दक्षिण क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र 7 विकेट से जीता | ब्रेबॉर्न स्टेडियम, मुंबई |
| 1985-1986 | पश्चिम क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र 1 विकेट से जीता | बाराबती स्टेडियम, कटक |
| 1984-1985 | दक्षिण क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र 9 विकेट से जीता | ईडन गार्डन्स, कोलकाता |
| 1983-1984 | उत्तरी क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र 8 विकेट से जीता | वानखेड़े स्टेडियम, मुंबई |
| 1982-1983 | उत्तरी क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र एक पारी और 49 रन से जीता | एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम, चेन्नई |
| 1981-1982 | पश्चिम क्षेत्र | पूर्वी क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र 3 विकेट से जीता | बाराबती स्टेडियम, कटक |
| 1980-1981 | पश्चिम क्षेत्र | पूर्वी क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र 8 विकेट से जीता | सरदार पटेल स्टेडियम, अहमदाबाद |
| 1979-1980 | उत्तरी क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र 1 विकेट से जीता | बाराबती स्टेडियम, कटक |
| 1978-1979 | उत्तरी क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र 6 विकेट से जीता | कीनन स्टेडियम जमशेदपुर |
| 1977-1978 | पश्चिम क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र 6 विकेट से जीता | एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम, चेन्नई |
| 1976-1977 | पश्चिम क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र 7 विकेट से जीता | वानखेड़े स्टेडियम, मुंबई |
| 1975-1976 | दक्षिण क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र 5 विकेट से जीता | बाराबती स्टेडियम, कटक |
| 1974-1975 | दक्षिण क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र 5 विकेट से जीता | यूनिवर्सिटी स्टेडियम चंडीगढ़ |
| 1973-1974 | उत्तरी क्षेत्र | मध्य क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र 184 रन से जीता | ईडन गार्डन्स, कोलकाता |
| 1972-1973 | पश्चिम क्षेत्र | मध्य क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र 6 विकेट से जीता | सवाई मानसिंह स्टेडियम, जयपुर |
| 1971-1972 | मध्य क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र | मध्य क्षेत्र 2 विकेट से जीता | सेंट्रल कॉलेज ग्राउंड बेंगलुरु |
| 1970-1971 | दक्षिण क्षेत्र | पूर्वी क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र 10 विकेट से जीता | ब्रेबॉर्न स्टेडियम, मुंबई |
| 1969-1970 | पश्चिम क्षेत्र | उत्तरी क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र एक पारी और 81 रन से जीता | सरदार पटेल स्टेडियम, अहमदाबाद |
| 1968-1969 | पश्चिम क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र पहली पारी की बढ़त के आधार पर जीता | लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम हैदराबाद |
| 1967-1968 | दक्षिण क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र पहली पारी की बढ़त के आधार पर जीता | ब्रेबॉर्न स्टेडियम, मुंबई |
| 1966-1967 | दक्षिण क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र पहली पारी की बढ़त के आधार पर जीता | ब्रेबॉर्न स्टेडियम, मुंबई |
| 1965-1966 | दक्षिण क्षेत्र | मध्य क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र एक पारी और 20 रन से जीता | एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम, चेन्नई |
| 1964-1965 | पश्चिम क्षेत्र | मध्य क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र एक पारी और 89 रन से जीता | ब्रेबॉर्न स्टेडियम, मुंबई |
| 1963-1964 | पश्चिम क्षेत्र और दक्षिण क्षेत्र | ड्रॉ | मैच ड्रॉ रहा और खिताब साझा किया गया | फिरोज शाह कोटला, दिल्ली |
| 1962-1963 | पश्चिम क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र 8 विकेट से जीता | ईडन गार्डन्स, कोलकाता |
| 1961-1962 | पश्चिम क्षेत्र | दक्षिण क्षेत्र | पश्चिम क्षेत्र 10 विकेट से जीता | ब्रेबॉर्न स्टेडियम, मुंबई |
* दलीप ट्रॉफी का आयोजन 2015-2016, 2020-2021 और 2021-2022 सीजन में नहीं हुआ था।
इतिहास और संरचना
भारत की घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिता को दलीप ट्रॉफी के रूप में जाना जाता है और इसे कुमार श्री दलीपसिंहजी की स्मृति में स्थापित किया गया था। प्रतियोगिता भारत के कई भौगोलिक क्षेत्रों के बीच आयोजित की जाती है। प्रतियोगिता की शुरुआत 1961-1962 में बीसीसीआई द्वारा की गई थी। भारत में जन्मे कुमार श्री दलीपसिंहजी ने 1905 से 1959 तक इंग्लैंड के लिए क्रिकेट खेला। उनका जन्म गुजरात में हुआ था। उन्होंने दाएं हाथ के बल्लेबाज और दाएं हाथ के लेग-ब्रेक गेंदबाज के रूप में इंग्लैंड के लिए टेस्ट मैचों और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में भाग लिया। बीसीसीआई ने 1959 में उनके निधन के बाद उनके सम्मान में भारत में इस प्रतियोगिता को शुरू करने का फैसला किया।
इस आयोजन में उत्तर, मध्य, पूर्व, पश्चिम और दक्षिण क्षेत्रों की पांच टीमें शामिल हैं। प्रतियोगिता की प्रारंभिक संरचना के तहत पांच जोनल टीमों ने नॉकआउट चरण में एक-दूसरे के खिलाफ प्रतिस्पर्धा की, लेकिन 1993-1994 सीज़न से इसने लीग प्रणाली को अपनाया। 2002-2003 सीज़न के लिए पांच जोनल टीमों की जगह एलीट ए, एलीट बी, एलीट सी, प्लेट ए और प्लेट बी नाम की टीमें बनाई गईं। ये नाम रणजी ट्रॉफी में उसी वर्ष शुरू किए गए एलीट और प्लेट डिवीजनों से जुड़े थे। नए नामों को लेकर भ्रम के कारण अगले सीज़न में टीमों के नाम फिर से क्षेत्रीय स्वरूप में कर दिए गए।
5 जोनल टीमों और छठी टीम इंग्लैंड ए ने 2003-2004 सीज़न में एक-दूसरे के खिलाफ प्रतिस्पर्धा की। दलीप ट्रॉफी में अतिथि टीम के रूप में भाग लेने वाली पहली विदेशी टीम इंग्लैंड ए थी। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) इलेवन ने 2004-2005 में अतिथि टीम के रूप में टूर्नामेंट में हिस्सा लिया। 2005-2006 में जिम्बाब्वे क्रिकेट यूनियन प्रेसिडेंट्स इलेवन ने और 2006-2007 में श्रीलंका ए ने अतिथि टीम के रूप में हिस्सा लिया, जबकि 2007-2008 में इंग्लैंड लायंस ने अतिथि टीम के रूप में भाग लिया। इसके बाद अतिथि टीमों की परंपरा को हटाकर 2014-2015 सीज़न तक मूल पांच-टीम नॉकआउट प्रतियोगिता का उपयोग किया गया।
दलीप ट्रॉफी 2015-2016 में नहीं खेली गई थी, लेकिन 2016-2017 में एक नए प्रारूप के साथ वापसी की। तीन टीमों इंडिया ब्लू, इंडिया ग्रीन और इंडिया रेड को बीसीसीआई चयनकर्ताओं द्वारा प्रतिस्पर्धा के लिए चुना गया। राउंड-रॉबिन प्रारूप में टीमों ने मुकाबले खेले, जिसमें शीर्ष 2 टीमें फाइनल में पहुंचीं। फाइनल में इंडिया ब्लू विजेता बनी। प्रतियोगिता में सभी मैच, जो सीज़न की शुरुआत में हुए थे, दिन-रात प्रारूप में खेले गए थे।
हालांकि रणजी ट्रॉफी को अक्सर राष्ट्रीय चैम्पियनशिप के रूप में मान्यता प्राप्त है, लेकिन भारत के कई क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए दलीप ट्रॉफी घरेलू स्तर पर एक महत्वपूर्ण मंच रही है। अपनी स्थापना के बाद से दलीप ट्रॉफी ने भारतीय क्रिकेट में प्रतिभाओं को पहचानने और विकसित करने में अहम भूमिका निभाई है। यह प्रतियोगिता लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर के चयन के लिए खिलाड़ियों के प्रदर्शन को परखने का एक महत्वपूर्ण अवसर रही है।
2026-2027 दलीप ट्रॉफी को शुरुआत 1961-1962 में होने के बावजूद केवल 63वां सीज़न क्यों माना जाता है? दलीप ट्रॉफी, जो 1961-1962 क्रिकेट सीज़न में शुरू हुई, एक प्रतिष्ठित भारतीय घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट है, जिसका इतिहास छह दशकों से भी ज्यादा पुराना है। हालांकि सीज़न की गिनती इसकी शुरुआत के बाद से बीते वर्षों की संख्या से मेल नहीं खाती, क्योंकि टूर्नामेंट में कई बार फॉर्मेट बदले गए हैं और कुछ सीज़न आयोजित ही नहीं हुए। प्रमुख कारण हैं:
- शुरुआत और प्रारंभिक वर्ष (1961-1962): दलीप ट्रॉफी को उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और मध्य क्षेत्र की टीमों के बीच क्षेत्रीय प्रतियोगिता के रूप में शुरू किया गया था। यह प्रारूप कई दशकों तक जारी रहा।
- प्रारूप में बदलाव: पिछले कुछ वर्षों में बीसीसीआई ने प्रारूप में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। टूर्नामेंट ने अलग-अलग समय पर नॉकआउट, लीग और अन्य टीम संरचनाओं को अपनाया। 2016-2017 सीज़न से प्रतियोगिता में इंडिया रेड, इंडिया ब्लू और इंडिया ग्रीन जैसी टीमों ने हिस्सा लिया।
- टूर्नामेंट में अंतराल: दलीप ट्रॉफी तीन सीज़न में आयोजित नहीं हुई - 2015-2016, 2020-2021 और 2021-2022 - जिसकी वजह डोमेस्टिक कैलेंडर में बदलाव और, बाद के दो मामलों में, कोविड-19 महामारी रही।
- हाल के सीज़न: वर्तमान सीज़न की गणना दलीप ट्रॉफी के हालिया प्रारूप और बीसीसीआई द्वारा आधिकारिक रूप से गिने गए सीज़न के आधार पर की जाती है।
टूर्नामेंट में प्रारूप परिवर्तन और अंतराल का यह इतिहास बताता है कि छह दशक पहले शुरुआत के बावजूद 2026-2027 दलीप ट्रॉफी को केवल 63वां सीज़न क्यों माना जाता है।
अंतिम विचार
दलीप ट्रॉफी भारत के सबसे दिलचस्प रेड-बॉल क्रिकेट टूर्नामेंट्स में से एक के रूप में लगातार आगे बढ़ रही है, जो परंपरा और आधुनिक क्रिकेट इनोवेशन का शानदार मिश्रण पेश करती है। इसका लंबे समय से चला आ रहा जोनल स्ट्रक्चर आज भी इसकी पहचान का अहम हिस्सा है, जो अलग-अलग क्षेत्रों के खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से ठीक नीचे के लेवल पर अपनी स्किल्स दिखाने का मंच देता है। समय के साथ शेड्यूलिंग, प्लेयर डेवलपमेंट पाथवे और टूर्नामेंट प्रेजेंटेशन में हुए सुधारों ने इस इवेंट को व्यस्त डोमेस्टिक क्रिकेट कैलेंडर में लगातार प्रासंगिक बनाए रखा है। बेहतर ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी और गहरी स्टैटिस्टिकल कवरेज ने क्रिकेट फैंस के लिए खिलाड़ियों के प्रदर्शन को करीब से फॉलो करना आसान बना दिया है, जिससे फॉर्म और कंडीशंस को समझने में दिलचस्पी रखने वाले फैंस को ज्यादा स्पष्टता और जानकारी मिलती है।
क्राउड इंटरेस्ट में लगातार बढ़ोतरी हुई है, खासकर बड़े क्रिकेट सेंटरों में जहां इस टूर्नामेंट को मजबूत समर्थन मिलता है। स्पॉन्सरशिप की भागीदारी वर्षों में घटती-बढ़ती रही है, क्योंकि टेक्नोलॉजी, फाइनेंस और कंज्यूमर सेक्टर से जुड़े ब्रांड्स इस प्रतियोगिता के साथ जुड़ने की अहमियत समझते हैं, भले ही अलग-अलग एडिशन के बीच स्पॉन्सरशिप डील आती-जाती रहती हों। बेहतर स्टेडियम एक्सपीरियंस, सुधरी हुई डिजिटल एक्सेस और ज्यादा लगातार कवरेज के साथ, दलीप ट्रॉफी डोमेस्टिक सीजन के एक प्रमुख क्रिकेट टूर्नामेंट के रूप में अपनी स्थिति को लगातार मजबूत कर रही है, जिससे फैंस को व्यापक डोमेस्टिक कैलेंडर शुरू होने से पहले ही फॉर्म, फिटनेस और टेम्परामेंट का भरोसेमंद शुरुआती संकेत मिल जाता है।








































